गलती करना ठीक है — डरो मत
डर
राजू चाय की दुकान पर बैठा है।
पास में कोई बात कर रहा है—"भाई, तीन साल पहले एक ऑटो से शुरू किया था। अब तीन गाड़ियां हैं। सब किराए पर चल रही हैं।"
राजू सुन रहा है। दिमाग में हिसाब लग रहा है।
वो भी Ola चलाता है। दो साल हो गए। सोचता है—"अपनी गाड़ी हो तो ज़्यादा कमाई हो।"
लोन मिल जाएगा। EMI भी निकल जाएगी। Numbers काम करते हैं।
पर एक डर है:
"अगर कुछ हो गया तो?"
"अगर गाड़ी में प्रॉब्लम आ गई तो?"
"चाचा क्या बोलेंगे—'बड़ा आया था समझदार'?"
तो रुक गया। "थोड़ा और देख लेता हूं।"
छह महीने बीत गए। वो अभी भी किराए की गाड़ी चला रहा है।
और वो आदमी जिसने तीन साल पहले try किया? वो अब तीन गाड़ियों का मालिक है।
सीधी बात
बचपन से सिखाया गया है:
- सही = समझदार
- गलत = शर्म की बात
पर जो लोग सच में आगे बढ़ते हैं—जो कुछ बनाते हैं, जो रिस्क लेते हैं—वो कुछ और समझते हैं:
सही होना कभी-कभी ज़रूरी है।
पर कोशिश करना, सीखना, बदलना—हमेशा ज़रूरी है।
अगर कभी गलती नहीं की, तो अपनी हद नहीं जानी।
बस वही किया जो सब करते हैं, जो सुरक्षित है, जो पक्का है।
पर तुम इससे ज़्यादा कर सकते हो।
गलती = हार नहीं।
कोशिश ही न करना = असली हार।
गलती का असली मतलब
सोचो:
- अगर कभी गिरना नहीं है, तो वही रास्ते चलोगे जो पहले से बने हैं
- अगर कभी ना नहीं सुनना, तो सिर्फ वही माँगोगे जो मिलना पक्का है
- अगर कभी चूकना नहीं है, तो निशाना ही कम रखोगे
गलती कमज़ोर होने का सबूत नहीं है।
गलती हद आज़माने का सबूत है।
गलती नया सीखने का सबूत है।
गलती आगे के लिए तैयार होने का सबूत है।
हम गलती से क्यों डरते हैं
स्कूल में गलत जवाब = लाल निशान।
घर में गलत फैसला = नाराज़गी।
मोहल्ले में गलत कदम = "देखा, बोला था ना।"
तो हम सीख गए—गलती से बचना है।
पर गलती से बचने की कीमत बड़ी है:
- मौके छूट जाते हैं — जो कभी try ही नहीं किया
- धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं — पता ही नहीं चलता क्या काम नहीं करता
- मन में अफसोस — "काश try किया होता"
जो लोग सबसे तेज़ बढ़ते हैं, वो गलती से नहीं बचते।
वो गलती करते हैं, सीखते हैं, और आगे बढ़ते हैं।
असली हार? रुक जाना—डर के मारे कुछ try ही न करना।
राजू की कहानी
उस चाय वाली बात के बाद राजू ने सोचा।
छह महीने और रुका। फिर एक दिन तय किया—"अब करना है।"
बैंक गया। लोन मिला। गाड़ी खरीदी।
पहले तीन महीने अच्छे गए। कमाई बढ़ी। EMI निकल रही थी। सब ठीक।
फिर गाड़ी में प्रॉब्लम आई। ₹15,000 का खर्चा। सोचा नहीं था इतना।
मुश्किल वक़्त
चाचा ने कहा—"बोला था ना, रिस्क मत ले।"
बीवी परेशान थी।
राजू भी टेंशन में।
पर उसने एक बात अलग की।
गाड़ी ठीक कराई। खर्चा सीखा। अगली बार के लिए याद रखा—हर महीने ₹2000 अलग रखना है रिपेयर के लिए।
आज की बात
एक साल बाद राजू की अपनी गाड़ी चल रही है। EMI निकल रही है। थोड़ी बचत भी हो रही है।
वो ₹15,000 का खर्चा? वो "गलती" नहीं थी। वो सीख थी।
अगर उसने try नहीं किया होता, तो आज भी किराए की गाड़ी चला रहा होता—और सोच रहा होता "काश..."
गलती को सही से देखो
जब भी गलती हो—या गलती का डर हो—यह तीन कदम आज़माओ:
गलती को सही से देखो
पहला कदम: गलती और खुद को अलग करो
बोलो: "मैंने गलत कदम उठाया।"
मत बोलो: "मैं गलत हूं।"
एक गलत फैसला तुम्हें बेवकूफ नहीं बनाता। एक काम न चलना तुम्हें नाकाम नहीं बनाता। काम और इंसान अलग चीज़ें हैं।
दूसरा कदम: सीख निकालो
पूछो:
- "इससे क्या सीखा?"
- "अगली बार क्या अलग करूंगा?"
- "क्या पता चला जो पहले नहीं पता था?"
हर गलती में कुछ सीख होती है। उसे निकालो।
तीसरा कदम: हिम्मत की तारीफ करो
सोचो: "बहुत लोग डर के रुक जाते हैं। मैंने कोशिश की।"
ज़्यादातर लोग वो कदम नहीं उठाते, वो रिस्क नहीं लेते, वो try नहीं करते। तुमने किया। बस यही तुम्हें आगे रखता है।
गलती = चलना।
चलना = रफ़्तार।
रफ़्तार से ही कुछ बनता है।
आखिरी बात
तुम किसी बड़ी चीज़ के किनारे खड़े हो।
शायद कोई काम जो शुरू नहीं किया।
शायद कोई बात जो नहीं बोली।
शायद कोई रिस्क जो बहुत दिनों से सोच रहे हो।
और जैसे ही आगे बढ़ने लगते हो, पुराना डर आ जाता है:
"अगर गलत हो गया तो?"
"अगर नुकसान हो गया तो?"
"लोग क्या कहेंगे?"
पर यह समझो:
गलती problem नहीं है।
गलती पहला सबूत है कि तुम असली खेल में हो।
जो लोग कुछ बनाते हैं, वो कभी fail नहीं होते—ऐसा नहीं है।
वो fail करते हैं और आगे बढ़ते हैं—सीखते हैं, बदलते हैं, safe वालों से तेज़ चलते हैं।
"कभी गलत नहीं हुआ" वाला रिकॉर्ड बचाना बंद करो।
"कोशिश की" वाला रिकॉर्ड बनाना शुरू करो।
इज़्ज़त ऐसे ही बनती है।
याद रखो
समझने की बात:
गलती हार का सबूत नहीं—चलने का सबूत है। असली हार है रुक जाना, डर के मारे कुछ try न करना।
टूल:
गलती को सही से देखो—3 कदम: गलती और खुद को अलग करो, सीख निकालो, हिम्मत की तारीफ करो।
कब इस्तेमाल करो:
जब गलती का दर्द हो, या गलती के डर से कुछ try नहीं कर पा रहे हो।
याद रखो:
अगर कभी गिरना नहीं, तो पुराने रास्ते चल रहे हो। असली खिलाड़ी गलती करते हैं—और गलती को गिनती करते हैं।